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Cycle of birth and death

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What is the cycle of birth and death? From this cycle of birth and death until the soul takes name initiation from a complete saint and does true worship he cannot get rid of this disease. In Gita chapter 15 verses 1 to 4 the identity of the complete saint is mentioned.

Supreme God

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🌹🌹🌹🌹 K abir Saheb is the supreme God. Holy Vedas testify that supreme God Kabir alone is worthy of being worshipped. For More information click this link & download this books. 👇👇👇 https://www.jagatgururampalji.org/way-of-living.pdf https://www.jagatgururampalji.org/gyan_ganga_english.pdf And to make your life successful, take initiation from the complete saint Rampal Ji Maharaj Please fulfill the form for getting initiation from him 👇👇👇👇 https://spiritualleadersaintrampalji.com/nam-diksha-inquiry

God Kabir Prakat Diwas

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कबीर साहेब प्रकट दिवस क्यों मनाया जाता है .... 🌹🌹 भारत देश (जम्बू द्वीप) के काशी नगर (बनारस) में नीरु-नीमा नाम के पति-पत्नी थे। वे  मुसलमान जुलाहा थे। वे निःसंतान थे। गरीब दास जी को परमात्मा कबीर साहेब ने अपने प्रकट होने की लीला बताई 👇👇👇 ज्येष्ठ सुदी पूर्णमासी की सुबह (ब्रह्म मुहूर्त में)लहरतारा नामक सरोवर में काशी के बाहर जंगल में मैं नवजात शिशु का रुप धारण करकेकमल के फूल पर लेटा था। मैं अपने इसी स्थान से गति करके गया था। नीरु जुलाहा तथा उसकी पत्नी प्रतिदिन उसी तालाब पर स्नानार्थ जाया करते थे। उस दिन मुझे बालक रुप में  प्राप्त करके अत्यन्त खुश हुए। मुझे अपने घर ले गए। मैंने 25 दिन तक कुछ भी आहार नहीं किया था। तब शिवजी एक साधु के वेश में उनके घर गए। वह सब मेरी प्रेरणा ही थी। शिव से मैंने कहा था कि मैं कंवारी गाय का दूध पीता हूँ। तब नीरु एक बछिया लाया। शिव को  मैंने शक्ति प्रदान की, उन्होंने बछिया की कमर पर अपना आशीर्वाद भरा हाथ रखा। कंवारी गाय ने दूध दिया। तब मैंने दूध पीया था। मैं प्रत्येक युग में ऐसी लीला करता हूँ। जब मैं शिशु रुप में प्रकट होता हूँ, ...

कर्म का फल

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🌹जमींदार और मजदूर के कर्म का फल 🌹 एक गांव में जमींदार और उसके एक मजदूर की साथ ही मौत हुई। दोनों यमलोक पहुंचे। धर्मराज ने जमींदार से कहा: आज से तुम मजदूर की सेवा करोगे। मजदूर से कहा: अब तुम कोई काम नहीं करोगे, आराम से यहां रहोगे। जमींदार परेशान हो गया। पृथ्वी पर तो मजदूर जमींदार की सेवा करता था, पर अब उल्टा होने वाला था। जमींदार ने कहा: भगवन, आप ने मुझे यह सजा क्यों दी? मैं तो भगवान का परम भक्त हूं। प्रतिदिन मंदिर जाता था। देसी घी से भगवान की आरती करता था और बहुमूल्य चीजें दान करता था। धर्म के अन्य आयोजन भी मैं करता ही रहता था। धर्मराज ने मजदूर से पूछा: तुम क्या करते थे पृथ्वी पर? मजदूर ने कहा: भगवन, मैं गरीब मजदूर था। दिन भर जमींदार के खेत में मेहनत मजदूरी करता था। मजदूरी में उनके यहां से जितना मिलता था, उसी में परिवार के साथ गुजारा करता था। मोह माया से दूर जब समय मिलता था तब भगवान को याद कर लेता था। भगवान से कभी कुछ मांगा नहीं। गरीबी के कारण प्रतिदिन मंदिर में आरती तो नहीं कर पाता था, लेकिन जब घर में तेल होता तब मंदिर में आरती करता था और आरती के बाद दीपक को अंधेरी...
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सत भक्ति मुक्ति संदेश आज तक हमने उस परमात्मा को अजन्मा, अजर-अमर कहा है लेकिन प्रमाणों से सिद्ध हुआ कि श्री ब्रह्मा श्री विष्णु तथा श्री शंकर तीनों नाशवान हैं फिर अविनाशी परमात्मा कौन है ?क्या ब्रह्मा, विष्णु तथा शंकर और काल ब्रह्म परमात्मा नहीं हैं? ये सभी जानकारी हमारे सभी शास्त्रों में है ।  भागवत गीता, रामायण, महाभारत को सभी ने पढ़ा है क्योंकि ये सभी विशेष प्रमाणित शास्त्रों में से हैं। विशेष विचारणीय विषय यह है कि जिन पवित्र शास्त्रों को हिन्दुओं के शास्त्र कहा जाता है, जैसे पवित्र चारों वेद व पवित्र श्रीमद् भगवत गीता जी आदि, वास्तव में ये सद् शास्त्र केवल पवित्र हिन्दु धर्म के ही नहीं हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये सर्व शास्त्र महर्षि व्यास जी द्वारा उस समय लिखे गए थे जब कोई अन्य धर्म नहीं था। इसलिए पवित्र वेद व पवित्र श्रीमद्भगवत गीता जी तथा पवित्र पुराणादि सर्व मानव मात्र के कल्याण के लिए है! हमारे सर्व पवित्र धर्म पवित्र 4 वेद ,6 शास्त्र ,18 पुराण ,कुरान शरीफ ,बाइबिल ग्रन्थ साहेब ,गीता में प्रमाण है  प्रभु /मालिक/ रब /खुदा /अल्लाह/ राम/ साहेब /गॉड /परमेश्वर सब...
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हमारे शास्त्र और सतभक्ति  आज तक हम सभी देवी देवताओं की भक्ति करते आये है फिर भी हम दुःखी है लेकिन क्यों सोचा है कभी आज पढ़े हुए लोग भी इस अंध भक्ति में लगे है और कभी नही जाना की भक्ति सही भी है या नही बिना कुछ सोचे ही लगे है  हम पुरानी पीढ़ियों की लीक पीटने पर ये एक बार भी नही जाना कि क्या जो पंडित हमे भक्ति विधि बता रहे है वो शास्त्र प्रमाणित है  हम तो सिर्फ लगे है  मनमानी साधना करने में लेकिन मनमानी साधना करने के लिए शास्त्रों में क्या लिखा है वो आप देखिए प्रमाण सहित 👇👇👇 श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 16 श्लोक 23,24 में स्पष्ट निर्देश है कि जो साधक शास्त्रों में वर्णित भक्ति की क्रियाओं के अतिरिक्त साधना व क्रियाऐं करते हैं, उनको न सुख की प्राप्ति होती है, अर्थात् व्यर्थ पूजा बतायी है । भेको के लस्कर फीरे ,ये वाणी चोर कठोर । सतगुरु धाम ना पहुंचेंगे ,ये चौरासी के ढोर ।। हमारे सर्व पवित्र धर्म पवित्र 4 वेद ,6 शास्त्र ,18 पुराण ,कुरान शरीफ ,बाइबिल ग्रन्थ साहेब ,गीता में प्रमाण है वो परमात्मा कबीर साहेब है । पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब है जो ...